Friday, October 5, 2012
सोलर एनर्जी
भारत में साल के 365 दिनों में तकरीबन 250 से 325 दिन अच्छी धूप वाले होते हैं। इन दिनों में सोलर रेडिएशन की तीव्रता काफी ज्यादा होती है।भारत में सौर ऊर्जा प्राप्त करने लायक दुनिया के कुल भूमि क्षेत्र का 58 फीसदी भाग पाया जाता है।
पृथ्वी प्रतिवर्ष लगभग 1, 20,000 टेरावॉट सौर ऊर्जा प्राप्त करती है..
पृथ्वी प्रतिवर्ष लगभग 1, 20,000 टेरावॉट सौर ऊर्जा प्राप्त करती है। पूरी दुनिया की ऊर्जा खपत सिर्फ 15 टेरावॉट सालाना है। भविष्य की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए भी इस अक्षय स्रोत पर भरोसा किया जा सकता है। एक साल में मनुष्य द्वारा ऊर्जा की जो कुल खपत होती है उतनी सौर ऊर्जा सिर्फ एक दिन में ही धरती पर पहुंच जाती है।
धनुष परमाणु-क्षमता संपन्न पृथ्वी मिसाइल का नौसैनिक संस्करण है..
धनुष परमाणु-क्षमता संपन्न पृथ्वी मिसाइल का नौसैनिक संस्करण है। इसकी मारक क्षमता 350 किलोमीटर है।
'मैं 39 साल का हूं, आप मुझसे 19 साल के लड़के की तरह खेलने की उम्मीद नहीं कर सकते हैं...तेंडुलकर.
'मैं 39 साल का हूं, आप मुझसे 19 साल के लड़के की तरह खेलने की उम्मीद नहीं कर सकते हैं। मैं जानता हूं कि मुझ में बहुत ज्यादा क्रिकेट नहीं बचा है। सवाल सिर्फ मानसिक स्थिति और फिटनेस का है। जब मुझे लगेगा कि मैं अपना बेस्ट नहीं दे पा रहा हूं, तो मैं फिर सोचूंगा। मैं हमेशा तो नहीं खेल सकता हूं। आपको सचाई का पता होना चाहिए। हालांकि यह बेहद कठिन फैसला होगा, क्योंकि अब तक सारी जिंदगी मैं क्रिकेट ही खेलता रहा हूं। अचानक ही रिटायर हो जाना वाकई में कठिन हैं। मैं बस सीरीज दर सीरीज हालात देख रहा हूं। मुझे भी हालात का सही अंदाजा नहीं है।'
Thursday, October 4, 2012
वर्तमान कानून प्रत्येक भू-मालिक को बोरवेल के द्वारा असीमित जल-दोहन का अधिकार देता है..
हमारी कुल जरूरत के दो-तिहाई से अधिक निर्भरता भू-जल पर ही है, देश के सभी भागों में घटता जल स्तर एक गंभीर चिंता का विषय है।वर्तमान कानून प्रत्येक भू-मालिक को बोरवेल के द्वारा असीमित जल-दोहन का अधिकार देता है। भू-जल के दोहन और उसके प्रतिस्पर्धी इस्तेमाल के समन्वय के लिए अभी तक कोई नियामक नहीं है। बिजली एवं जल के लिए अपर्याप्त एवं कम कीमतों से भी इनके दुरूपयोग को बढ़ावा मिलता है.
राष्ट्रीय जल मिशन ने जल उपयोग क्षमता में 20 प्रतिशत सुधार का लक्ष्य रखा है..
जल पर सामान्य सिद्धांतों की एक वृहत राष्ट्रीय कानूनी रूपरेखा तैयार की जाए, जो सभी राज्यों में जल शासन पर आवश्यक विधान तैयार करने में मददगार हो सके, हमें अन्य प्रस्तावों पर भी ध्यान देने की जरूरत है जो कि संस्थागत कमियों को और एकीकृत एवं सुसंगत जल नीति के क्रियान्वयन को जोड़ने में मदद करेंगे। राष्ट्रीय जल मिशन ने जल उपयोग क्षमता में 20 प्रतिशत सुधार का लक्ष्य रखा है, इसकी दशा सबसे अधिक कृषि क्षेत्र में दयनीय है, जो कि हमारे सभी जल संसाधनों का तीन-चौथाई हिस्सा इस्तेमाल करता है और जहां जल उपयोग क्षमता अंतर्राष्ट्रीय मापदंडों की तुलना में कम है।
योजना आयोग ने 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान जल संसाधनों को तर्कसंगत और सतत तरीके से प्रबंध करने की चुनौतियों को गंभीर चुनौतियों में से एक माना है..
योजना आयोग ने 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान जल संसाधनों को तर्कसंगत और सतत तरीके से प्रबंध करने की चुनौतियों को गंभीर चुनौतियों में से एक माना है, इसके लिए कई मोर्चों पर कार्रवाई तथा हमारी आर्थिकी के विभिन्न क्षेत्रों में परस्पर समन्वय की आवश्यकता होगी। राष्ट्रीय जल नीति का प्रारूप जल संसाधनों की योजना और प्रबंधन के लिए इकाई के रूप में नदी घाटी/उप घाटी के सुझाव देता है तथा यह प्रस्ताव करता है कि केंद्र और राज्य स्तर पर विभागों/संगठनों की पुनर्संरचना के साथ-साथ इसे बहुपक्षीय बनाया जाना चाहिए। यह प्रत्येक राज्य में जल नियामक प्राधिकरणों की स्थापना तथा विभिन्न राज्यों के बीच जल से संबंधित मुद्दों पर चर्चा के जरिये सहमति, सहयोग और सामंजस्य बनाने के लिए एक राष्ट्रीय मंच की स्थापना का भी प्रस्ताव करता है।
जल की अत्यधिक निकासी के कारण विभिन्न भागों में भू-जलस्तर घट रहा है...
विश्व की लगभग 17 प्रतिशत जनसंख्या और उपयोग में लाए जाने वाले स्वच्छ जल की केवल चार प्रतिशत की उपलब्धता के साथ भारत में जल की कमी है।जल की अत्यधिक निकासी के कारण विभिन्न भागों में भू-जलस्तर घट रहा है, जिसके कारण दूषित करने वाले फ्लोराइड, आर्सेनिक तथा अन्य रसायनों की मात्रा बढ़ जाती है.
राष्ट्रीय जल मिशन
जलवायु परिवर्तन पर प्रधानमंत्री की कार्ययोजना के तहत राष्ट्रीय जल मिशन शुरू किया। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण, जल की बर्बादी कम करना और राज्यों अथवा संघ में जल का समान वितरण सुनिश्चित करने के लिए जल संसाधनों का एकीकृत प्रबंधन करना है।
राष्ट्रीय जल नीति (2012)
जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण और आर्थिक विकास के कारण जल की बढ़ती मांग ने जल संसाधनों पर अत्याधिक दबाव बनाया है जिससे कि अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर भारत जल की परेशानी से जूझता देश बन गया है।जल संसाधन मंत्रालय ने राष्ट्रीय जल नीति (2012) तैयार की है।
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