Showing posts with label चीन. Show all posts
Showing posts with label चीन. Show all posts

Tuesday, December 25, 2012

दक्षिण चीनी सागर में गंभीर हो रहे क्षेत्रीय विवाद में चीन और भारत आपस में टकरा रहे हैं

दक्षिण चीनी सागर में गंभीर हो रहे क्षेत्रीय विवाद में चीन और भारत आपस में टकरा रहे हैं. मामले की जड़ में मुद्दा तेल है. चीन लगभग पूरे दक्षिणी चीन सागर पर अपना दावा कर रहा है. वियतनामी तट से 70 किलोमीटर दूर चीन तेल के नौ कुएं अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को दे रहा है. लेकिन इनमें से दो कुएं वियतनाम ने पहले से ही भारत को देने का वायदा कर रखा है.

1962 में युद्ध के बाद से भारत में चीन के प्रति गहरा अविश्वास है..

1962 में युद्ध के बाद से भारत में चीन के प्रति गहरा अविश्वास है. इस अविश्वास को इस बात से और बल मिलता है कि चीन भारत के विकास को रोकना चाहता है. इसका एक उदाहरण सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट पाने की भारत की कोशिश है.चीन भारत को सुरक्षा परिषद की स्थायी सीट देने के विचार से उत्साहित नहीं है लेकिन उसने कभी खुल कर इसके खिलाफ बोला नहीं है.चीन भारत को अपने लीग का खिलाड़ी नहीं मानता. चीन अमेरिका के साथ एक धरातल पर खेलना चाहता है न कि भारत के साथ. इसलिए चीन को पाकिस्तान की जरूरत है, ऊर्जा सुरक्षा, हिंद महासागर में प्रवेश और चीनी विदेश व्यापार के परिवहन की सुरक्षा के लिए. चीन और भारत के धुर दुश्मन पाकिस्तान के रिश्ते बहुत करीबी हैं.

चीन में इस तरह की योजनाएं हैं कि ब्रह्मपुत्र के पानी को सूखा प्रभावित इलाकों में मोड़ दिया जाए..

उत्तरी चीन और भारत में सूखे की समस्या को देखते हुए पानी के इस्तेमाल का मुद्दा नए प्रकार के विवाद की संभावना रखता है.ग्लोबल वॉटर सिक्योरिटी के लेखकों का कहना है कि आने वाले दिनों में पानी को लेकर ज्यादा झगड़े होंगे. आबादी के बढ़ने और जलवायु परिवर्तन के कारण संसाधन घट रहे हैं और मांग बढ़ रही है. चीन ने मेकांग, सालवीन और ब्रह्मपुत्र नदियों पर बांध बनाना शुरू कर दिया है. नदियों के निचले हिस्से वाले देशों में इस पर चिंता है कि उनके हिस्से में नदियों में पानी कम हो सकता है.चीन में इस तरह की योजनाएं हैं कि ब्रह्मपुत्र के पानी को सूखा प्रभावित इलाकों में मोड़ दिया जाए. तकनीकी रूप से यह फिलहाल संभव नहीं है, लेकिन भारत चिंतित है.

Friday, November 16, 2012

चीन में हर दस साल में नेतृत्व परिवर्तन होता है..

चीन में नए नेताओं का ऐलान कर दिया गया है. शी जिनपिंग सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता चुने गए हैं और वहीं देश के अगले राष्ट्रपति होंगे.शी मौजूदा राष्ट्रपति हू चिनताओ का स्थान लेंगे जो साल 2003 से चीनी सत्ता की बागडोर संभाले हुए हैं. चीन में हर दस साल में नेतृत्व परिवर्तन होता है.पोलित ब्यूरो की नई स्थायी समिति के सदस्यों की संख्या नौ से घटा कर सात कर दी गई है. नई समिति में शी जिनपिंग, ली केचियांग, छांग डेजियांग, लियु युनशान, वांग किशान और छांग गाओली शामिल हैं.

Monday, November 12, 2012

चीन के पुरुष प्रधान समाज में महिला राजनेता होना विलक्षण बात है..

परंपरागत रूप से चीन के पुरुष प्रधान समाज में महिला राजनेता होना विलक्षण बात है.चीन के इतिहास में अब तक जो महिलाएं सबसे ताकतवर रही हैं उनमें एक थीं महारानी डोवाजर सिक्शी और दूसरी थीं माओत्से तुंग की पत्नी जियांग क़िंग. प्रोफेसर गुओ जियाजुआन के मुताबिक राजनीति में चीनी महिलाओं की भागीदारी के मामले में 1975 में चीन का स्थान विश्व में 12वां था जो कि आज खिसककर 64वें स्थान पर पहुंच गया है.

Friday, October 19, 2012

चीन की पंच वर्षीय योजना

चीन की मौजूदा पंच वर्षीय योजना के अनुसार साल 2010 से 2015 तक उसका लक्ष्य 40 प्रतिशत के आर्थिक विकास की दर को हासिल करना है. साथ ही चीन कार्बन डाईऑक्साईड तीव्रता को 17 फ़ीसदी घटाना भी चाहता है.