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Friday, October 19, 2012
बनी-ठनी राजस्थान के रूप लावण्य का प्रतिबिंब बन गई है..
बनी-ठनी में राधा कृष्ण है तो प्रेम और भक्ति भी है.किशनगढ़ की चित्र शैली मुगल बादशाहत के दौर में पर्शिया के फराज से लाए गए चित्रकारों की कला का ही विस्तार माना जाता है.बनी-ठनी राजस्थान के रूप लावण्य का प्रतिबिंब बन गई है.उसमें नायिका की बादाम जैसी आँखे, धनुष सरीखी भौंए ,उभरी ठोड़ी ,लंबी अंगुलियां और गुलाबी अदा है.इसमें औरत का रूप सौंदर्य से भरपूर है
बनी-ठनी एक ऐतिहासिक चित्रकृति है..
किशनगढ़ रियासत के एक चित्रकार ने जब राजा की अनाम प्रेयसी को तस्वीर में उभारा तो उस बेपनाह खूबसूरती देखने वाले ने बनी-ठनी का नाम दिया. ये किशनगढ़ के तत्कालीन राजा सावंत सिंह के दौर की बात है.बनी-ठनी पहले राजा सावंत सिंह के ख्वाबों में आई, फिर केनवास पर उतरी.बनी-ठनी एक ऐतिहासिक चित्रकृति है.दुनिया भर में इसका नाम है. उसमे नायिका के तीखे नाक नक्श है.
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