Wednesday, February 27, 2013

इकनॉमिक सर्वे

संसद में इकनॉमिक सर्वे पेश हो गया. अगले साल सरकार को मंदी खत्म होने के साथ अर्थव्यवस्था में मजबूती लौटने की उम्मीद है।सर्वे में मंदी खत्म होने के साथ महंगाई दर में गिरावट की उम्मीद जताई गई है। सर्वे में कहा गया है कि महंगाई दर में गिरावट की वजह से ब्याज दरों में कटौती हो सकती है।सर्वे में फाइनैंशल इयर 2014 में जीडीपी दर 6.1-6.7 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है। मार्च महीने में महंगाई दर घटकर 6.2-6.6 फीसदी रहने की उम्मीद है।सर्वे में कहा गया है कि रेल मालभाड़ा 2012-13 में 5.1 फीसदी बढ़ा है।

Wednesday, February 13, 2013

रूस का प्रोग्रेस एम-18एम मालवाहक अंतरिक्ष यान

रूस का प्रोग्रेस एम-18एम मालवाहक अंतरिक्ष यान अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र (आईएसएस) पहुंच गया।प्रोग्रेस एम-18एम कजाकिस्तान के बैकानूर से छोड़ा गया था। यह अंतरिक्ष यान पानी, भोजन, व्यक्तिगत साफ-सफाई के सामान, चिकित्सकीय एवं फोटो उपकरण, रूसी झंडे और आईएसएस के सदस्यों के लिए उपहार लेकर गया हुआ है। 1972 से अबतक 130 से अधिक प्रक्षेपणों का रिकार्ड बना चुके प्रोग्रेस श्रेणी के मालवाहक यान रूसी अंतरिक्ष कार्गो बेड़े की रीढ़ बने हुए हैं. प्रोग्रेस मालवाहक अंतरिक्ष यान, उपकरण के अतिरिक्त 2,500 किलोग्राम की आपूर्ति ढोने की क्षमता रखते हैं।

दस करोड़ वर्ष से भी पहले गोंडवाना विखंडन के दौरान भारतीय क्षेत्र का कुछ हिस्सा ऑस्ट्रेलियाई प्लेट की तरफ चला गया जिससे हिंद महासागर का वर्तमान क्षेत्र और रूप सामने आया...

दस करोड़ वर्ष से भी पहले गोंडवाना विखंडन के दौरान भारतीय क्षेत्र का कुछ हिस्सा ऑस्ट्रेलियाई प्लेट की तरफ चला गया जिससे हिंद महासागर का वर्तमान क्षेत्र और रूप सामने आया।ऑस्ट्रेलिया की वैज्ञानिक एना गिब्सन ने भारतीय राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान और ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर किए शोध में पाया कि उपमहाद्वीप में विखंडन के बाद भारतीय क्षेत्र का कुछ हिस्सा ऑस्ट्रेलियाई प्लेट की तरफ चला गया । तस्मानिया के बराबर का क्षेत्रफल ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी तट से करीब 500 से 1000 किलोमीटर की दूरी पर समुद्र तल में डूबा रहा।

Friday, February 8, 2013

इस समय बाघों की संख्या 1706 है...

इस समय बाघों की संख्या 1706 है, जो वर्ष 2008 की संख्या के मुकाबले 295 अधिक है। उस समय बाघों की संख्या 1411 थी।वर्ष 2012 के पहले नौ महीनों में भारत में 252 तेंदुए की मौत हुई, जो भारतीय वन्य जीव संरक्षण सोसायटी के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 1994 से यह संख्या सबसे अधिक है। आयोग ने 12वीं योजना में बाघ संरक्षण के लिए 5889 करोड़ रुपए का आवंटन किया है जबकि 11वीं योजना में यह राशि मात्र 651 करोड़ रुपए थी।

राष्‍ट्रीय बाल स्‍वास्‍थ्‍य कार्यक्रम

स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्रालय की ओर से राष्‍ट्रीय बाल स्‍वास्‍थ्‍य कार्यक्रम की शुरूआत की गई है, जिसके माध्‍यम से अधिकतम 18 वर्ष तक की उम्र के बच्‍चों के लिए स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के एक पैकेज का प्रावधान किया गया है। यह पहल राष्‍ट्रीय ग्रामीण स्‍वास्‍थ्‍य मिशन का एक हिस्‍सा है. महाराष्‍ट्र के ठाणे जिले के जनजातीय बहुल ब्‍लॉक पालघर में 06 फरवरी को शुरू किया गया. लक्ष्‍य बच्‍चों की मुख्‍य बीमारियों का शीघ्र पता लगाना और उसका निदान करना है। इन बीमारियों में जन्‍मजात विकृतियों, बाल रोग, कमियों के लक्षणों और विकलांगताओं सहित विकास संबंधी देरी शामिल हैं।

खाद्यान्‍न उत्‍पादन

भारत में वर्ष 2012-13 में 250.14 मिलियन टन खाद्यान्‍न उत्‍पादन (खरीफ 2012 और वर्तमान में रबी फसलों समेत) होने की उम्‍मीद है। पिछले वर्ष अनुकूल मॉनसून की वजह से रिकॉर्ड खाद्यान्‍न उत्‍पादन हुआ था। वर्तमान वर्ष (2012-13) में मॉनसून के दौरान देश के अनेक भागों में कम और देर से बारिश होने के बावजूद अनुमानित उत्‍पादन पिछले वर्ष से पहले किसी समय में हुए खाद्यान्‍न उत्‍पादन से काफी अधिक है।

एक बार भगवान बुद्ध ने अपने भिक्षुओं को उपदेश देते हुए कहा कि भिक्षा पात्र में जो कुछ प्राप्त हो जाए, वही ग्रहण कर लेना चाहिए...

एक बार भगवान बुद्ध ने अपने भिक्षुओं को उपदेश देते हुए कहा कि भिक्षा पात्र में जो कुछ प्राप्त हो जाए, वही ग्रहण कर लेना चाहिए। दैवयोग से एक दिन एक भिक्षु के पात्र में चील ने एक मांस का टुकड़ा डाल दिया। इस पर भिक्षु ने भगवान बुद्ध से पूछा, तो भगवान बुद्ध ने सामान्य भाव से कह दिया कि इसे ग्रहण कर लीजिए। परंतु इस का परिणाम भविष्य में यह हुआ कि लोग भगवान बुद्ध के उस वाक्य को पकड़कर मांसाहार करने लगे

अशोक के शिलालेख


अशोक के १४ शिलालेख विभिन्‍न लेखों का समूह है जो आठ स्थानों से प्राप्त किए गये हैं-

(१) धौली- यह उड़ीसा के पुरी जिला में है ।

(२) शाहबाज गढ़ी- यह पाकिस्तान (पेशावर) में है ।

(३) मान सेहरा- यह हजारा जिले में स्थित है ।

(४) कालपी- यह वर्तमान उतराखंड (देहरादून) में है ।

(५) जौगढ़- यह उड़ीसा के जौगढ़ में स्थित है ।

(६) सोपरा- यह महराष्ट्र के थाणे जिले में है ।

(७) एरागुडि- यह आन्ध्र प्रदेश के कुर्नूल जिले में स्थित है ।

(८) गिरनार- यह काठियावाड़ (गुजरात ) में जूनागढ़ के पास है ।

अशोक के लघु स्तम्भ लेख


सम्राट अशोक की राजकीय घोषणाएँ जिन स्तम्भों पर उत्कीर्ण हैं उन्हें लघु स्तम्भ लेख कहा जाता है जो निम्न स्थानों पर स्थित हैं-

१. सांची- मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में है ।

२. सारनाथ- उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में है ।

३. रूभ्मिनदेई- नेपाल के तराई में है ।

४. कौशाम्बी- इलाहाबाद के निकट है ।

५. निग्लीवा- नेपाल के तराई में है ।

६. ब्रह्मगिरि- यह मैसूर के चिबल दुर्ग में स्थित है ।

७. सिद्धपुर- यह ब्रह्मगिरि से एक मील उ. पू. में स्थित है ।

८. जतिंग रामेश्‍वर- जो ब्रह्मगिरि से तीन मील उ. पू. में स्थित है ।

९. एरागुडि- यह आन्ध्र प्रदेश के कूर्नुल जिले में स्थित है ।

१०. गोविमठ- यह मैसूर के कोपवाय नामक स्थान के निकट है ।

११. पालकिगुण्क- यह गोविमठ की चार मील की दूरी पर है ।

१२. राजूल मंडागिरि- यह आन्ध्र प्रदेश के कूर्नुल जिले में स्थित है ।

१३. अहरौरा- यह उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में स्थित है ।

१४. सारो-मारो- यह मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में स्थित है ।

१५. नेतुर- यह मैसूर जिले में स्थित है ।

समुद्रगुप्त

समुद्रगुप्त को भारत का नेपोलियन कहा जाता है । वह अपनी जिंदगी में कभी भी पराजित नही हुआ । उसका विजय अभियान भारत के हर क्षेत्र में कामयाब रहा । प्रथम आर्यावर्त के युद्ध में उसने तीन राजाओं को हराकर अपने विजय अभियान की शुरुआत की । इसके बाद दक्षिणापथ के युद्ध में दक्षिण के बारह राजाओं को पराजित कर उन्हें अभयदान दिया । यह उसकी दूरदर्शी निति का ही परिणाम था ,वह दक्षिण के भौगोलिक परिस्थितियों को भलीभांति समझता था । आर्यावर्त के द्वितीय युद्ध में उसने नौ राजाओं को हरा कर उन्हें अपने साम्राज्य में मिला लिया । बाद में उसने सीमावर्ती राजाओं और कई विदेशी शक्तियों को भी पराजित कर अपनी शक्ति का लोहा मानने पर मज़बूर कर दिया। समुद्रगुप्त ही गुप्त वंश का वास्तविक निर्माता था । उसका प्रधान सचिव हरिसेन ने प्रयाग प्रशस्ति की रचना की जिसमे समुद्रगुप्त के विजयों के बारें में विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है । समुद्रगुप्त ने अश्वमेघ यज्ञ भी करवाया । वह वीणा बजाने में भी कुशल था । उसके दरबार में बुधघोष जैसे विद्वान् आश्रय पाते थे ।